शुक्रवार, 24 मई 2013

शिक्षा पद्धति ऐसी होनी चाहिए जो हमारे अनुकूल हो !!

किसी भी देश की शिक्षा पद्धति उस देश के आगामी भविष्य को तय करती है और उस देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि जो शिक्षा दी जा रही है वो आने वाले भविष्य की समस्याओं का सामना करने वाली पीढ़ी तैयार कर पा रही है या नहीं कर पा रही है ! जहां तक भारत के सन्दर्भ में देखें तो हमारी शिक्षा पद्धति  इस तरह की लगती नहीं है और अब आजादी के पैंसठ सालों के बाद देखकर तो ऐसा लगता है कि हमारी शिक्षा पद्धति समस्याओं का सामना करने वाली पीढ़ी तैयार करने की बजाय समस्याएं ज्यादा पैदा करने वाली पीढ़ी ही तैयार कर रही है ! 

दरअसल आजादी मिलनें के बाद हमनें अपने हिसाब से कोई शिक्षा पद्धति बनायी ही नहीं और लोर्ड मेकाले द्वारा लागू की गयी उस शिक्षा पद्धति को ही अपना लिया जिसका उद्धेश्य ही भारतियों के मन में अंग्रेजों के वर्चस्व को स्थापित करना था ! और उस शिक्षा पद्धति का परिणाम ही है कि हम सदियों पहले भारतियों द्वारा खोज की गयी किसी बात पर तब तक विश्वास नहीं कर पाते हैं जब तक पश्चिमी देशों से जुड़े हुए कोई वैज्ञानिक अथवा चिकित्साविद्द उस पर अपनी मोहर ना लगा दे ! हम अपनी और से उस सच्चाई को जानने का प्रयास भी नहीं करते हैं जबकि पश्चिमी देशों के लोग जब प्रयास करते हैं और हमारे ही ज्ञान को हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं तो हम बिना विचार किये उसको स्वीकार और अंगीकार कर लेते हैं ! और मैकाले की शिक्षा पद्धति की यही सबसे बड़ी सोच थी जो कारगर होती हुयी दिखाई पड़ रही है !

हमनें हमारी शिक्षा पद्धति को केवल और केवल साक्षरता तक सिमित करके रख दिया है जिसको रोजगारोन्मुखी बनाने के बारे में कभी सोचा ही नहीं और सोचते भी कैसे हमनें तो अपनी अलग से कोई शिक्षा पद्धति बनायी ही नहीं ! जिसका परिणाम सामने हैं आज बेरोजगारों की लंबी लाइन देश में लगी हुयी है ! दरअसल इस बढती बेरोजगारी के पीछे हमारी ज्यादा जनसँख्या नहीं है बल्कि हमारी गलत शिक्षा पद्धति है ! अगर हमनें हमारी शिक्षा पद्धति को रोजगारोन्मुखी बनाया होता तो आज यही ज्यादा जनसँख्या हमारी आर्थिक सम्पनता को बढाने वाली होती लेकिन अफ़सोस हमनें इस और ध्यान ही नहीं दिया ! जिसका परिणाम यह हुआ कि इस शिक्षा पद्धति से निकले युवाओं के सामने नौकरी ही एकमात्र लक्ष्य रह जाता है ! और हमारे पास इतनी नौकरियां देने के लिए है नहीं जिससे बेरोजगारी दूर हो जाए ! इसलिए हमारी बढती बेरोजगारी के पीछे हमारी दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति ही है !

बृहस्पतिवार, 23 मई 2013

मीडिया ,मीडिया कम चक्करघिन्नी ज्यादा नजर आता है !!

आजकल भारतीय मीडिया को बैठे बिठाए ख़बरें चाहिए और अगर किसी तरह का कोई मसाला खबर बनने लायक मिल जाता है तो उसको अनवरत चक्करघिन्नी की तरह चलाता रहता है ! खासतौर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो आज ऐसा हि करता है ! अब आप क्रिकेट में फिक्सिंग वाली खबर को हि ले लीजिए ! जब से मामला उजागर हुआ है तब से ऐसा लगता है कि इस क्रिकेट फिक्सिंग वाली एकमात्र खबर को छोडकर देश में कुछ हो हि नहीं रहा है ! दरअसल दोनों दिन भारतीय मीडिया एक हि खबर को लगातार दिखाकर पकाऊ बनता जा रहा है !

जबकि पिछले कई वर्षों में देखा जाए तो इलेक्ट्रोनिक मीडिया किसी भी तरह की जानकारियों को उजागर करने में नाकाम रहा है ! प्रिंट मीडिया तो फिर भी कई बार कुछ उजागर करता है लेकिन इलेक्ट्रोनिक मीडिया ऐसा कुछ नहीं करता है ! बस किसी और माध्यम से उजागर हुयी जानकारियों को हि चक्करघिन्नी की तरह घुमाता रहता है जिससे जनता धीरे धीरे उबती जा रही है ! दरअसल इलेक्ट्रोनिक मीडिया में व्यवसायिक सोच पत्रकारिता की सोच के ऊपर बेतहाशा हावी हो चुकी है ! जिसके कारण वो बेठे बिठाए ऐसा मसाला चाहता है जिससे कुछ दिन तक दर्शकों को बहलाया जा सकें !

दर्शकों को बहलाने वाली सोच को आप उसके दिन भर चलने वाले कार्यकर्मों के जरिये देख सकतें हैं ! ऐसी कौनसी बात है जो मीडिया नहीं दिखाता है भले ही उस बात से अन्धविश्वास को हि बढ़ावा क्यों नहीं मिलता हो ! ज्योतिष,फ़िल्मी बातें ,धार्मिक कार्यक्रम और क्रिकेट आदि सब कुछ तो मीडिया पर हाजिर है और फिर भी समय बचता है तो चक्करघिन्नी की तरह चलने वाली ख़बरें तो है ही ! हकीकत में मीडिया की सोच जानकारियों को जनता तक पहुंचाने के बजाय समय गुजारने की ज्यादा बनती जा रही है ! जिसके कारण ही कुछ चैनल तो ऐसे हैं जो छोटी छोटी बातों को बढचढकर दिखाते हैं और उनको आक्रात्मकता के साथ पेश करने की कोशिश करतें हैं !

बुधवार, 22 मई 2013

सत्ता परिवर्तन से क्या पाकिस्तान की नियत बदल जायेगी !!

पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन होनें पर क्या पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में कोई सुधार आएगा और क्या पाकिस्तान बदल जाएगा ! भारत के हुक्मरानों की पाकिस्तान के प्रति गर्मजोशी देखकर तो ऐसा हि लगता है कि पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन होते ही भारत पाकिस्तान के रिश्तों में बहुत बड़ा बदलाव आ जाएगा ! भारतीय प्रधानमंत्री नें पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री के सत्ता सँभालने से पूर्व ही भारत आने का न्यौता तक दे डाला और भारतीय प्रधानमंत्री के न्यौते को तो औपचारिकता के तौर पर माना जा सकता है ! लेकिन अब तो बिहार के मुख्यमंत्री भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को बिहार आने का न्यौता दे रहें हैं ! अब भला उनसे कोई पूछे कि बिहार क्या भारत से अलग है और अगर बिहार भारत में ही है तो फिर उनको अलग न्यौता देनें की क्या जरुरत पड़ी ! लेकिन वोटबैंक की राजनीति जो ना करवाए वही कम है ! 

पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन तो होता हि आया है ! और पाकिस्तान बनने के बाद से अब तक के भारत पाकिस्तान के रिश्तों पर नजर डालें तो यही पता चलता है कि पाकिस्तान में सता परिवर्तन का दोनों देशों के आपसी रिश्तों में किसी तरह का परिवर्तन होता नहीं है ! फिर हम इस बार इतने आशान्वित क्यों है ! और ऐसा भी नहीं है कि इस बार पाकिस्तान की सत्ता पर कोई ऐसा राजनेता बैठ रहा है जिससे भारत को किसी तरह की आशा दिखाई देती है ! पाकिस्तान की सत्ता पर इस बार भी वही नवाज शरीफ बैठ रहे हैं जिनके शासनकाल में पहले भी पाकिस्तान भारत को कारगिल युद्ध का घाव दे चूका है और हमनें अपने चार सौ से ज्यादा बहादुर सैनिकों की शहादत का बोझ पाकिस्तान के नापाक मनसूबे के चलते उठाया था ! फिर हम क्यों इतने आशान्वित हैं !

दरअसल हमारी सरकारों का पाकिस्तान को लेकर हमेशा हि ढुलमुल रवैया रहता है और हम रिश्ते सुधारने की ऐसी इकतरफा चाहत दिखाने लग जाते हैं जिसका परिणाम यह है कि पाकिस्तान यह समझ बैठा है कि कुछ भी होगा तो कुछ दिन भारत दिखावे का विरोध करेगा और फिर भूल जाएगा और वही हो रहा है ! अभी कुछ दिन हि नहीं गुजरे हैं जब पाकिस्तान नें हमारे दो सैनिकों के सर काट दिए थे और उसके बाद देश की जनता के गुस्से को देखते हुए हमारी सरकार नें कहा था कि अब पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य नहीं रह सकते लेकिन वो बात जबानी जमाखर्च के सिवाय नजर नहीं आई और उसके बाद सरबजीत वाला मामला हो गया लेकिन जिस तरह से पाकिस्तान के नए प्रधानमन्त्री को भारत आने का न्यौता दिया जा रहा है उससे तो सन्देश यही जा रहा है कि हम वाकई गंभीर नहीं है !

सोमवार, 20 मई 2013

मुस्लिम समाज की देश के प्रति निष्ठा पर संदेह क्या सही है !!

कई बार यह देखने में आता है कि मुसलमानों की देश के प्रति निष्ठा को संदेह कि नजर से देखा जाता है और कई बार तो यह तक माना जाता है कि यहाँ के मुसलमान पाकिस्तान के प्रति निष्ठा रखते हैं ! क्या इसके लिए वे लोग जिम्मेदार है जो मुसलमानों कि निष्ठा पर संदेह करते हैं या फिर वाकई भारतीय मुसलमानों कि देश के प्रति निष्ठा संदेहास्पद है ! इसके पक्ष में कई तरह के तर्क और वितर्क दिए जा सकते हैं लेकिन उन तर्कों वितर्कों में नहीं जाकर कुछ बातों पर गौर तो किया जाना चाहिए जिससे स्थति को समझा जा सके और विचार किया जा सके !

मुसलमानों कि निष्ठा को संदेहास्पद बनाने में सबसे बड़ा हाथ तो उन राजनैतिक पार्टियों का ही है जो अपने आपको सबसे ज्यादा मुस्लिम हितैषी दिखाने के लिए जी जान से जुटी रहती है ! आपने कई बार देखा होगा कि बात जब पाकिस्तान के खिलाफ बोलने कि आती है तो इन्ही पार्टियों के नेताओं का लहजा या तो नरम हो जाता है या फिर ये नेता बोलने से बचते हुए दिखाई देते हैं ! और ऐसा करने के पीछे इन पार्टियों की सोच ये होती है कि इससे मुस्लिम समाज के लोग नाराज हो जायेंगे ! अब ये जाहिर सी बात है कि अगर इनके पाकिस्तान के विरुद्ध कड़ी बात कहने से मुस्लिम समाज नाराज होता है तो फिर यही समझा जाएगा ना कि मुस्लिमों कि आस्था भारत से ज्यादा पाकिस्तान के प्रति है तभी तो वो नाराज होगा वर्ना उसके नाराज होने का कोई कारण नहीं दीखता है ! 

 ऐसा करके इन पार्टियों के  नेता मुस्लिमों का भला करने की बजाय उनका बुरा हि कर रहे हैं और उनकी निष्ठा को हि संदेहास्पद बना रहे हैं ! इससे उन पार्टियों को राजनैतिक फायदा यह मिलता है कि मुसलमान नासमझी में उनके वोटबैंक बनकर रह जाते हैं ! आपने अभी पिछले दिनों में हि देखा होगा कि भारत का पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ हि तनाव था तब ऐसे नेता चीन के प्रति तो अपना तल्ख़ रवैया दिखा रहे थे लेकिन पाकिस्तान के प्रति किसी भी तरह का तल्ख़ रवैया इन नेताओं का देखने को नहीं मिला ! अभी पिछले दिनों समाचारों में आपने सुना हि होगा कि उतरप्रदेश में समाजवादी पार्टी कि सरकार आतंकवाद के आरोपों में जेलों में बंद मुस्लिम युवकों को छोड़ने जा रही है ! अब आप खुद सोचिये कि आतंकवादियों को जेलों से छोड़ने जैसे फैसले लेकर ऐसी पार्टियां किसका भला कर रही है ! असल में तो ऐसा करके वो ना देश का भला कर रही है और ना हि मुसलमानों का भला कर रही है !

मुसलमानों की देश के प्रति निष्ठा को संदेहास्पद बनाने में दूसरा बड़ा हाथ मुस्लिम समाज के उन लोगों का है जो कहने को तो अपने आपको मुस्लिमों के नेता अथवा उनकी आवाज उठाने वाले कहते है लेकिन ये लोग मुसलमानों को हकीकत से रूबरू करवाने कि बजाय और उनके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है इसका विचार किये बिना चुनावों के समय इन्ही पार्टियों को फायदा पहुंचाने के लिए इन्ही पार्टियों के साथ मिल जाते हैं ! कुछ तो ऐसे है जो हर चुनावों में अलग अलग पार्टियों के पाले में नजर आते हैं ! और विवादित बयानों द्वारा सांप्रदायिक सद्भाव में जहर घोलने का काम करते हैं ! इस तरह से वो अपने अपने निजी स्वार्थों के लिए पुरे मुस्लिम समाज को हि संदेहास्पद बनाने का काम करते रहते हैं !

रविवार, 19 मई 2013

शुगर ( Diabetes ) को दूर भगाए इस घरेलु आयुर्वेदिक उपचार से !!

डाइबिटीज अथवा शुगर ( मधुमेह )एक ऐसी बीमारी है जो किसी को एक बार हो जाए तो लगातार एलोपेथिक दवाइयां लेनी पड़ती है और उसके बाद भी उससे छुटकारा दिला पाने में ये दवाइयां नाकाम रहती है ! आज में आपके सामने शुगर के लिए ऐसा आयुर्वेदिक नुस्खा लेकर आया हूँ जो आपको शुगर से निजात दिला सकता है और इसको घर पर तैयार किया जा सकता है ! जो बिलकुल सस्ता भी है ! घरेलु आयुर्वेदिक उपचार होने के कारण किसी तरह के नुकशान की कोई सम्भावना भी नहीं है ! आशा करता हूँ कि इस आयुर्वेदिक नुस्खे का प्रयोग करने वाले अपना अनुभव रूपी प्रतिक्रिया अवश्य देंगे ताकि अन्य लोग भी इसको आजमाने के लिए प्रेरित होंगे ! एक बात और यह केवल दो सप्ताह का हि उपचार है उसके बाद इसकी आवश्यकता नहीं है !

आवश्यक वस्तुएं :-
१. गेहूं का आटा                  -             १०० ग्राम 
२.वृक्ष से निकली गोंद        -             १०० ग्राम 
३.जौ                                 -             १०० ग्राम 
४.कलौंजी                         -              १०० ग्राम 

निर्माण विधि :-
उपरोक्त सभी सामग्री को पांच कप पानी में डालकर आग पर दस मिनट उबालें ! उसके पश्चात उसको नीचे उतारकर अपने आप ठंडा होने के लिए रख दें ! तत्पश्चात इस पानी को छानकर किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख लें !